कोरोना से देशभर में 382 डॉक्टरों ने गंवाई जान, IMA ने की शहीद का दर्जा देने की मांग |

कोरोना से देशभर में 382 डॉक्टरों ने गंवाई जान,

IMA ने की शहीद का दर्जा देने की मांग |

coronavirus cases in india: कोरोना से देशभर में 382 डॉक्टरों ने गंवाई जान, IMA ने की शहीद का दर्जा देने की मांग | इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने बताया कि 16 सितंबर को आईएमए के पास कोरोना (Corona) से जुड़ा जो आकड़ा उपलब्ध है उसके मुताबिक कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी से अब तक 2238 डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं जबकि 382 की मौत हो चुकी है.

नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है.

कोरोना (Corona) से अब तक देशभर में 52,14,678 लोग संक्रमित हो चुके हैं

जबकि 84,372 लोगों की मौत हो चुकी है.

कोरोना महामारी के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कोरोना मरीजों का इलाज करने के दौरान जान गवाने वाले डॉक्टरों के लिए आवाज उठाई है.

आईएमए ने इस बात को लेकर भी नाराजगी जताई है कि

स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने संसद में कोरोना से डॉक्टरों की मौत को लेकर कोई जिक्र नहीं किया.

आईएमए ने इस पर आपत्ति जताते हुए इस संक्रमण से जान गंवाने वाले 382 डॉक्टरों की लिस्ट जारी की है

और सरकार से उन्हें शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की है.

 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्वास्थ्य राज्यमंत्री अ​श्विनी कुमार चौबे के उस बयान पर आपत्ति जताई है,

जिसमें उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल राज्य के अधीन आते हैं

इसलिए केंद्र सरकार के पास बीमा मुआवजा का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है.

आईएमए ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,

संसद में दिया गया इस तरह का बयान हमारे लोगों के लिए खड़े होने वाले राष्ट्रीय नायकों को त्यागने और कर्तव्य से पीछे हटने के समान है.

 

एसोसिएशन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि 16 सितंबर को आईएमए के पास कोरोना से जुड़ा जो आकड़ा उपलब्ध है

उसके मुताबिक कोरोना महामारी से अब तक 2238 डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं

जबकि 382 की मौत हो चुकी है.

आईएमए ने कहा कि किसी भी देश में इतने डॉक्टरों की मौत नहीं हुई जितनी मौत भारत में हुई है.

 

एसोसिएशन ने कहा है कि अगर सरकार कोरोना संक्रमित डॉक्टरों

और जान गंवाने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का आंकड़ा नहीं रख सकती

तो उसे महामारी अधिनियम, 1897 और आपदा प्रबंधन कानून लागू करने का नैतिक अधिकार नहीं है.

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