रामसखा “सुग्रीव’ के नाम पर नहीं है इंडोनेशियाई हिंदू यूनिवर्सिटी, लेकिन हिंदुत्व की जड़ें गहरी हैं |

रामसखा “सुग्रीव’ के नाम पर नहीं है इंडोनेशियाई हिंदू यूनिवर्सिटी,

लेकिन हिंदुत्व की जड़ें गहरी हैं |

 

रामसखा “सुग्रीव’ के नाम पर नहीं है इंडोनेशियाई हिंदू यूनिवर्सिटी, लेकिन हिंदुत्व की जड़ें गहरी हैं |

इसी साल फरवरी में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति (President of Indonesia) जोको विडोडो (Joko Widodo) ने बाली के देनपासर स्थित एक हिंदू इंस्टीट्यूट को इंडोनेशिया की पहली हिंदू यूनिवर्सिटी (UHN) के तौर पर विकसित करने का रास्ता साफ कर दिया था.

हिंदी ही नहीं, बल्कि भारतीय मीडिया (Indian Media) में इस तरह की खबरें आईं कि

इस यूनिवर्सिटी का नाम रामचरित मानस (Ramcharit Manas) के लोकप्रिय पात्र और

भगवान राम (Lord Rama) के सखा सुग्रीव के नाम पर रखा गया.

लेकिन ये तथ्य गलत है.

 

इंडोनेशिया में इस हिंदू यूनिवर्सिटी का नाम आई गुस्ती बागस सुग्रीव स्टेट हिंदू यूनिवर्सिटी (I Gusti bagus Sugriwa State Hindu University) रखा गया है,

जो राजधानी बाली में स्थित हिंदू धर्म स्टेट इंस्टीट्यूट को विकसित कर बनाई गई.

यह इंस्टीट्यूट 1993 में हिंदू धर्म के टीचरों के लिए स्टेट अकादमी के रूप में शुरू हुआ था.

इसके बाद इसे हिंदू स्टेट कॉलेज के तौर पर विकसित किया गया था और

2004 में इसने IHDN इंस्टीट्यूट की शक्ल इख्तियार की थी.

 

अब ये जो दावा किया गया और सोशल मीडिया पर भी इस तरह के प्रचार होते रहे हैं कि

रामायण के पात्र सुग्रीव पर इस यूनिवर्सिटी का नाम रखा गया,

तो इसका सच यह है कि यह नामकरण इंडोनेशिया के एक सामुदायिक और धार्मिक नेता आई गुस्ती बागस सुग्रीव के नाम पर हुआ है.

फिर भी, मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया में यह हिंदू यूनिवर्सिटी कैसे बनी और

इस देश में हिंदुत्व की जड़ों को लेकर क्या रोचक तथ्य हैं, यह जानना दिलचस्प है.

 

क्या खास है इस यूनिवर्सिटी में?

हिंदू यूनिवर्सिटी में ‘एडमिनिस्टर हिंदू हायर ऐजुकेशन प्रोग्राम’ के साथ ही हिंदू हायर ऐजुकेशन प्रोग्राम को सपोर्ट करने वाले उच्च शिक्षा कार्यक्रम भी होंगे.

खबरों में कहा जा चुका है कि मौजूदा IHDN विद्यार्थियों को UHN में कन्वर्ट कर दिया गया.

केवल छात्र ही नहीं बल्कि इस इंस्टीट्यूट की सभी प्रॉपर्टी और

कर्मचारी भी नई यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर किए जा चुके हैं.

 

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इस्कॉन मंदिर ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति को कृष्ण भक्त बताया था.

इस यूनिवर्सिटी की अहमियत

इंडोनेशिया में हिंदू मान्यताओं के लिहाज़ से इस यूनिवर्सिटी का विकसित होना ऐतिहासिक माना गया है

क्योंकि 23 करोड़ 76 लाख से ज़्यादा की इंडोनेशियाई आबादी में 40 लाख से कुछ ज़्यादा ही हिंदू आबादी है,

यानी यह 2% भी नहीं है.

हालांकि इस जनगणना को लेकर विवाद रहा है.

इसके बावजूद इंडोनेशिया ने अपनी जड़ों को बरकरार रखते हुए हिंदू मान्यताओं और संस्कृति को विशेष संरक्षण देने का सिलसिला जारी रखा है.

विशेषज्ञ भी कह चुके हैं कि राष्ट्रपति ने बाली में हिंदू ऐजुकेशन संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया.

 

इंडोनेशिया में हिंदू संस्कृति के प्रतीक

हिंदू यूनिवर्सिटी के कदम ने एक बार फिर यह साबित किया कि

इंडोनेशिया ने अपनी ऐतिहासिक पहचान, विरासत और हिंदुत्व की अपनी जड़ों को मिटाने नहीं

बल्कि सहेजने का काम किया है.

आइए आपको बताते हैं कि कैसे इंडोनेशिया हिंदुत्व के संरक्षण में अग्रणी रहा है.

पिछले साल यहां एक हज़ार साल से भी पुराने एक हिंदू मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया.

 

सेंट्रल जावा में स्लेमन और क्लाटेन के बीच स्थित प्रंबनन मंदिर परिसर में 1100 साल बाद महाभिषेक का आयोजन किया गया.

यह नौवीं सदी में बना भव्य मंदिर है

जो दुनिया के सबसे बड़े शिव मंदिरों में शुमार है.

यही नहीं, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोकोवी खुद को कृष्ण भक्त बता चुके हैं और

कह चुके हैं कि भगवान कृष्ण को उनके देश में महाशक्तिशाली माना जाता है.

 

कहां कहां है इंडोनेशिया में हिंदुत्व की छाप?

द्वीप के तौर पर सबसे बड़े देश इंडोनेशिया की मुद्रा का नाम रुपैया है.

देश में 20 हज़ार रुपैया का जो नोट है,

उस पर भगवान गणेश का चित्र छापा जाता रहा है.

दावों की मानें तो यह दुनिया की इकलौती करंसी है,

जिस पर किसी हिंदू देवता का चित्र है.

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक मुख्य और

ऐतिहासिक चौराहे पर अर्जुन विजय की प्रतिमा लगी हुई है.

 

हिंदुत्व इंडोनेशिया की विरासत रहा है और

इसी को रेखांकित करने के लिए इंडोनेशिया ने अपनी सेना इंटेलिजेंस का शुभंकर प्रतीक भगवान हनुमान को बनाया है.

इसी तरह, देश की रिसर्च यूनिवर्सिटी के बांडुंग इंस्टीट्यूट के लोगो में भगवान गणेश का चित्र है.

 

पिछले साल अगस्त के महीने में इंडोनेशिया में गरुड़ विष्णु के 120 मीटर लंबी प्रतिमा का अनावरण किया गया था.

इसे दुनिया में विष्णु की सबसे बड़ी मूर्ति कहा जाता है.

हिंदू देवी देवताओं के प्रतीकों के साथ ही इस देश में संस्कृत को भी खासा महत्व मिला है.

इंडोनेशियाई नौसेना का मोटो ‘जलेसेवा जयमहे’ है.

 

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ट्विटर पर पोस्ट किया गया इंडोनेशियाई नोट.

एक तरफ, पाकिस्तान ने अपने उस इतिहास और धरोहरों को मिटाने का काम किया,

जो हिंदुत्व से जुड़ी हुई थीं, तो दूसरी तरफ, इंडोनेशिया ने अपने अतीत की हिफाज़त की.

इंडोनेशिया में अब भी कट्टर इस्लाम के आरोप गंभीर नहीं है

क्योंकि वो अपने बीते कल से छुटकारे के लिए परेशान नहीं है.

 

क्या हैं इंडोनेशिया में हिंदुत्व की जड़ें?

इस द्वीप पर करीब 2000 साल पहले से भारतीय व्यापारियों, यात्रियों, विद्वानों और

धार्मिक गुरुओं के आने जाने के चलते हिंदुत्व इंडोनेशिया पहुंचा था.

जावा के लोक धर्म, संस्कृति के साथ हिंदू संस्कृति और धर्म का मेल हुआ.

छठी सदी में यहां बुद्ध धर्म के विचार भी पहुंचे.

इससे इंडोनेशिया का अपना एक हिंदुत्व विचार विकसित हुआ.

श्रीविजय और मजापही साम्राज्यों के दौरान यहां हिंदुत्व काफी फला फूला.

इसके बाद, 14वीं सदी में यहां मुस्लिम व्यापारियों के साथ इस्लाम ने दस्तक दी

और कुछ ही सदियों में यह द्वीप इस्लाम का गढ़ हो गया.

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