बेलारूस में लुकाशेंकों के विरोध में शामिल हुईं हजारों महिलाएं, पत्रकारों की मान्यता की रद्द |

बेलारूस में लुकाशेंकों के विरोध में शामिल हुईं हजारों महिलाएं,

पत्रकारों की मान्यता की रद्द |

बेलारूस में लुकाशेंकों के विरोध में शामिल हुईं हजारों महिलाएं, पत्रकारों की मान्यता की रद्द | बेलारूस (Belarus) की सड़कों पर हजारों की संख्या में महिलाएं प्रदर्शन (Women’s Protest) करने उतर आईं. महिलाओं के हाथों में झंडे, फूल और बैलून थे और वे सरकार के खिलाफ जोरशोर से नारे लगा रही थीं.

मास्को. बेलारूस (Belarus) की सड़कों पर हजारों की संख्या में महिलाएं प्रदर्शन (Women’s Protest) करने उतर आईं.

महिलाओं के हाथों में झंडे, फूल और बैलून थे और वे सरकार के खिलाफ जोरशोर से नारे लगा रही थीं.

इस महीने हुए विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव (Disputed Presidential Election) के बाद से लगातार विरोध और प्रदर्शन जारी हैं.

शनिवार को हुए प्रोटेस्ट में सिर्फ महिलाएं शामिल हुई.

वहीं बेलारूस सरकार ने विदेशी मीडिया के लिए काम करने वाले कुछ पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी.

यह जानकारी समाचार संगठनों और एक पत्रकार संघ ने शनिवार को दी.

सरकार की ओर से पत्रकारों पर यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया ​ताकि देश में चल रहे विरोध की तस्वीर विदेशी मीडिया में ना आ पाए.

 

26 सालों से सत्ता पर काबिज हैं ​लुकाशेंको

बेलारूस के नए चुने गए राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने एक बार फिर से विपक्षियों के इस आरोप को कि 9 अगस्त को हुए चुनाव में धांधली बरती गई है, को खारिज कर दिया है.

लुकाशेंको का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को पश्चिमी देशों से फंडिंग मिल रही है.

उन्होंने नाटो पर यह आरोप लगाया ​है कि उसकी सेनाएं बेलारूस की सीमा पर बड़ी संख्या पर तैनात है.

हालांकि इस बात को नाटो ने खारिज कर दिया है.

गौरतलब है कि पिछले 26 सालों से बेलारूस की सत्ता पर काबिज हैं.

उन्हें यहां लोग ‘अंतिम तानाशाह’ के रूप में जानते हैं.

महिलाओं ने भारी तादाद में शनिवार को धरना दिया और भाईचारे के लिए रैली निकाली और

लुकाशेंको से इस्तीफा देने को कहा.

महिलाएं नारे लगा रही थीं- यह हमारा शहर है और आप हमें बेहतर तरीके से सुरक्षा दे सकते हैं.

बहुत सारी महिलाओं ने इस मौके पर राष्ट्रीय पोशाक पहनी हुई थीं.

महिलाएं जिस सड़क से विरोध करते हुए आगे बढ़ रही थीं, वहां भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए.

राजधानी मिंस्क के अलावे छोटे पैमाने पर रैलियां दूसरे शहरों और कस्बों में भी आयोजित ​की गईं.

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